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बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक कब लगाना चाहिए

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक कब लगाना चाहिए

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक कब लगाना चाहिए

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हमारे हिंदू धर्म में पेड़-पौधों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है। तुलसी, नीम, बरगद, शमी, और बेलपत्र के पेड़ को विशेष महत्व दिया गया है। बेलपत्र का पेड़ भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और इसकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। आइए जानते हैं कि बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक कब और कैसे लगाना चाहिए और इससे क्या लाभ होते हैं।

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का महत्व

बेलपत्र के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह अनुष्ठान करने से सुख-समृद्धि, शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। बेलपत्र को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है और इस पेड़ के नीचे दीपक जलाने से उनकी विशेष कृपा मिलती है।

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक कब लगाना चाहिए ( दीपक जलाने का सही समय )

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का सबसे शुभ समय सोमवार और प्रदोष का दिन माना जाता है। यह दोनों दिन भगवान शिव को विशेष प्रिय हैं। इस दिन दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

दीपक जलाने की विधि

  1. दीपक का चयन: बेलपत्र के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है क्योंकि भगवान शिव को सफेद रंग प्रिय है और घी सफेद रंग का होता है।
  2. मंत्र का जाप: पुरुषों को दीपक जलाते समय “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए जबकि महिलाओं को “केवन नम: शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए।
  3. दीपक रखने का स्थान: बेलपत्र के पेड़ की जड़ के पास दीपक जलाना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार, बेल के पेड़ की जड़ में भगवान शिव का वास होता है और इसे लिंग रूप भी कहा जाता है।

महिलाओं के लिए ॐ मंत्र का उच्चारण क्यों वर्जित है?

धर्म शास्त्र के अनुसार, ॐ का उच्चारण करने से वैराग्य की भावना आती है जो महिलाओं के लिए वर्जित है। महिलाओं का मुख्य कर्तव्य परिवार का संचालन करना होता है, इसलिए उनके लिए वैराग्यता नहीं लाना चाहिए। जबकि पुरुष ॐ मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं।

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने के लाभ

निष्कर्ष

बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। इस अनुष्ठान को सही विधि से करने से भगवान शिव और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सोमवार और प्रदोष के दिन इस अनुष्ठान को करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

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